बच्चों के अधिकारों को सुरक्षा प्रदान करना समाज का नैतिक कर्तव्य है: न्यायाधीश मनु गोयल खर्ब

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नई दिल्ली : [टाईम फॉर न्यूज़ – सहायक संपादक गौरव तिवारी ] दक्षिण पश्चिम जिला विधिक सेवाएँ प्राधिकरण ,मंडलीय शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान घुम्मनहेड़ा एवं भागीदारी जन सहयोग समिति के संयुक्त तत्वाधान में कानूनी जन जागरूकता कार्यक्रम के अंतर्गत बाल अधिकार संरक्षण एवं साइबर-सुरक्षा विषय पर आयोजित वेबिनार में बोलते हुए न्यायाधीश मनु गोयल खर्ब सचिव जिला प्राधिकरण ने बाल अधिकारों पर विस्तृत चर्चा करते हुए कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं और बच्चों के अधिकारों को  सुरक्षा प्रदान करना समाज का नैतिक कर्तव्य है । यह दुःख का विषय है कि बच्चों के यौन उत्पीड़न के साथ – साथ उनका मानसिक उत्पीड़न भी होता है। माता – पिता में लॉकडाउन के कारण उत्पन्न हुई निराशा ने बच्चों को भी  उत्पीड़ित किया है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग एवं राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अधिनियम के क्रियान्वन में महत्वपूर्ण भूमिका का भी उल्लेख किया उन्होंने कहा किआयोग का अधिदेश यह सुनिश्चित करना है कि समस्त विधियाँ, नीतियाँ कार्यक्रम तथा प्रशासनिक तंत्र बाल अधिकारों के संदर्श के अनुरूप हों, जैसा कि भारत के संविधान तथा साथ ही संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार सम्मेलन (कन्वेशन) में प्रतिपादित किया गया है।

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अध्यापक को बच्चे का अति समीप मित्र बताते हुए  न्यायाधीश मनु गोयल  ने कहा कि बच्चे अपने साथ हुए किसी भी प्रकार के शोषण को अध्यापक के साथ जल्दी साझा करते है अतः अध्यापक का यह कर्तव्य है कि वह अपने प्रशिक्षण को खरा साबित करे और बच्चों के साथ आत्मीय भाव रख उसके साथ किसी भी प्रकार का शोषण ना होने दे

डाइट घुम्मनहेड़ा के प्रधानाचार्य डॉ दिनेश कुमार ने कक्षा में बच्चों को शारीरक  दंड को उनके अधिकारों का स्पष्ट हैं हनन बताते हुए कहा कि अध्यापक को स्वयं सामाजिक एवं शैक्षणिक दृष्टि से इतना सक्षम होना चाहिए कि शारीरिक दंड का विचार ही मन में न आये ।

भागीदारी जन सहयोग समिति के महासचिव एवं सामजिक कार्यकर्ता विजय गौड़ ने कहा कि अध्यापकों को स्कूल में बच्चों की पारिवारिक स्थिति को देखते हुए उनकी वे समस्याओं को समझने का प्रयास करना चाहिए तथा  अकारण उन्हें दंड न दें उनके साथ मैत्रीपूर्ण व्यवहार करें ।

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एमिटी यूनिवर्सिटी ग्वालियर के  निदेशक (पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग) प्रोफेसर सुमित नरूला ने साइबर सुरक्षा पर अपने विचार अभिव्यक्त करते हुए किस प्रकार बच्चों को साइबर बुलिंग से बचाया जा सकता है उसके उपाय साझा किये। लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन शिक्षण के चलते बच्चे के हाथ में मोबाइल देना भी पड़ता है तो उस पर नज़र रखना भी आवश्यक है। बच्चों के साथ खुल कर बात करें तथा एक जागरूकता का वातावरण उत्पन्न करने की आवश्यकता है। उन्होंने बच्चों के जीवन कौशलों के विकास करने पर भी बल दिया। निदेशक सुमित  ने बताया कि सरकार भी बच्चों को ध्यान में रखते हुए साइबर बुलिंग से सम्बंधित कार्य कर रही है न्यायाधीश मनु गोयल  ने कहा सोशल साइट्स में से कुछ शब्द जैसे सेक्सुअल , पोर्न इत्यादि फ़िल्टर कर दिए गए हैं जिससे बच्चे उस तक न पहुँच सकें।

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